मां कूष्मांडा कौन हैं? नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा का महत्व और सही विधि
नवरात्रि चौथे दिन मां कूष्मांडा पूजा विधि, महत्व और सावधानियां नवरात्रि में मां कूष्मांडा की पूजा में इन बातों का रखें खास ध्यान, वरना माता हो सकती हैं नाराज नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का महान अवसर है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। चौथे दिन मां दुर्गा का कूष्मांडा रूप पूजित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्त के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। लेकिन यदि पूजा में लापरवाही हो जाए, तो माता प्रसन्न होने के बजाय अप्रसन्न भी हो सकती हैं। इसलिए इस दिन पूजा में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। मां कूष्मांडा कौन हैं? मां कूष्मांडा दुर्गा का चौथा स्वरूप हैं। पुराणों में वर्णन है कि जब सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था और हर ओर अंधकार ही अंधकार था, तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसीलिए इन्हें "सृष्टि की आदि जननी" और "ऊर्जा का स्रोत" कहा जाता है। मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है क्योंकि इनके आठ भुजाएं हैं। इनके हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, चक्र, गदा, कम...