बीएड-बीएसटीसी छात्र बंक नहीं कर पाएंगे, ऑनलाइन होगी उपस्थिति — क्या बदल गया है और इसका असर

 अब बीएड-बीएसटीसी छात्र बंक नहीं कर पाएंगे, ऑनलाइन होगी उपस्थिति — क्या बदल गया है और इसका असर



राजस्थान शिक्षा विभाग ने बीएड और बीएसटीसी प्रशिक्षणार्थियों के इंटर्नशिप कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। अब इंटरनशिप के दौरान स्कूल में जाकर उपस्थिति दर्ज करने के बजाय कई जगह जो छात्र बिना आए-जाए “बंक” कर के उपस्थिति लेते थे, उस प्रथा को रोकने के लिए विभाग ने ऑनलाइन उपस्थिति सिस्टम लागू कर दिया है। इस कदम का मकसद पारदर्शिता बढ़ाना, प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारना और फर्जी उपस्थिति रोकना है।

पुराना सिस्टम बनाम नया सिस्टम

पहले प्रशिक्षणार्थी कई बार स्कूल में रह कर ही नहीं आते थे, लेकिन प्रिंसिपल या किसी सहकर्मी के द्वारा उनकी उपस्थिति मैन्युअली दर्ज कर दी जाती थी। इससे कई बार इंटर्नशिप का वास्तविक अनुभव खो जाता था और प्रशिक्षु शिक्षण के व्यवहारिक पक्ष से कट जाते थे।
नए सिस्टम में स्कूल-प्रिंसिपल और प्रशिक्षण संस्थान दोनों की निगरानी के साथ शाला दर्पण जैसे पोर्टल पर प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। बिना वास्तविक उपस्थिति के कोई प्रशिक्षण प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा।

नया सिस्टम कैसे काम करेगा

हर दिन स्कूल के प्रधानाचार्य या प्रभारी द्वारा प्रशिक्षणार्थी की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज होगी।
प्रशिक्षण संस्थान (कॉलज) उस रिकॉर्ड को सत्यापित कर सकेंगे।
इंटर्नशिप पूरा होने पर ही प्रमाण पत्र जारी होगा, और उस अवधि के अनुपस्थित दिनों की जानकारी भी रिकॉर्ड रहेगी।
विभाग समय-समय पर रिपोर्ट निकालकर अनुपस्थितियों और अटेंडेंस पैटर्न की जांच कर सकेगा।

इस बदलाव का असर किस पर पड़ेगा

प्रशिक्षणार्थी पर
वास्तविक स्कूल माहौल में आने की जिम्मेदारी बढ़ेगी। जो छात्र पहले बंक मार कर समय काटते थे, उन्हें अब प्रतिदिन स्कूल में जुड़कर व्यावहारिक अनुभव लेना होगा। इससे उनकी शिक्षण क्षमता, क्लास-मैनेजमेंट और बाल-मनोविज्ञान की समझ बेहतर होगी। साथ ही, अनुपस्थित या लापरवाही करने वालों को इंटर्नशिप प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा और भविष्य में नौकरी व प्रवेश प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
स्कूल और शिक्षकों पर
प्रधानाचार्यों और स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी बढ़ेगी कि वे रोज उपस्थिति सही तरीके से दर्ज करें। यह काम थोड़ा अतिरिक्त समय ले सकता है, पर डिजिटल रिकॉर्ड होने से बाद के प्रोसेस आसान होंगे। कुछ छोटे स्कूलों में तकनीकी सुविधा की समस्या आ सकती है जिसे विभाग को हल करना होगा।

प्रशिक्षण संस्थानों और विभाग पर
कॉलजों को भी वास्तविकता पर नजर रखनी होगी और ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। विभाग के लिए भी यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने का जरिया बन जाता है।

फायदे (Benefits)

पारदर्शिता: नकली उपस्थिति पर रोक लगेगी।
बेहतर प्रशिक्षण: छात्र वास्तविक क्लास-रूम का अनुभव लेंगे।
डेटा-आधारित निगरानी: विभाग को सही आंकड़े मिलेंगे और नीतियां प्रभावी बनेंगी।
जवाबदेही: स्कूल और प्रशिक्षण संस्थान दोनों जिम्मेदार होंगे।
छात्रों का कल्याण: जो छात्र मेहनत करते हैं उन्हें सही पहचान मिलेगी।

चुनौतियाँ और समाधान

तकनीकी अड़चनें: ग्रामीण या छोटे स्कूलों में इंटरनेट और डिवाइस की कमी हो सकती है। समाधान: ऑफलाइन-टू-ऑनलाइन सिंक फीचर, मोबाइल एप और जिला-स्तर पर स्पोर्ट।
कागजी कारवाई एवं प्रशिक्षण: प्रधानाचार्यों और स्टाफ को नए सिस्टम का प्रशिक्षण देना होगा। समाधान: शॉर्ट वर्कशॉप और वीडियो ट्यूटोरियल।
डेटा प्राइवेसी: उपस्थिति के डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा जरूरी है। समाधान: सुरक्षित पोर्टल, सीमित एक्सेस और नियमित ऑडिट।
छात्रों के लिए सुझाव
इंटर्नशिप को सिर्फ प्रमाणीकरण तक सीमित न रखें। क्लास-रूम मैनेजमेंट, पाठयक्रम तैयारी और मूल्यांकन में सक्रिय भाग लो।
अनुपस्थित होने पर पहले संबंधित प्रिंसिपल और संस्थान को सूचना दे कर रिकॉर्ड में नोट करवाओ।
डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप के बारे में सीखो ताकि रोजाना के रिकॉर्ड में दिक्कत न हो।
गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में भी भाग लो, यह अनुभव रिज्यूमे में काम आएगा।

निष्कर्ष

शिक्षा विभाग का यह कदम समयानुकूल और जरूरी है। फर्जी उपस्थिति या बंक मार कर उपस्थिति दर्ज कराने की प्रथा से प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली इससे न सिर्फ पारदर्शिता लाएगी बल्कि प्रशिक्षुओं की व्यवहारिक योग्यता बढ़ाने में भी मदद करेगी। हालाँकि तकनीकी व प्रशिक्षण संबंधी चुनौतियाँ रहेंगी, पर सही कार्यान्वयन और समुचित प्रशिक्षण से ये दूर की जा सकती हैं। अंततः इसका लाभ शिक्षण पेशे और शिक्षा के स्तर दोनों को मिलेगा।

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