महिलाओं में खून की कमी दूर करने के घरेलु उपाय
हर 2 में से 1 भारतीय महिला खून की कमी से जूझ रही है
एनीमिया के लक्षण, असली कारण और वो सस्ते इलाज जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं
⚠️ सदमे में डालने वाला सच
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, 57% भारतीय महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। यानी हर दो में से एक महिला के शरीर में खून की कमी है। यह आंकड़ा ग्रामीण इलाकों में और भी भयावह है - वहां 60% से अधिक महिलाएं इसकी शिकार हैं।
सबसे डरावनी बात यह है कि 15-49 आयु वर्ग की 52% महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं - वह उम्र जब उन्हें सबसे अधिक ऊर्जा और स्वास्थ्य की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाओं की बात करें तो 52.2% गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं, जो न केवल उनकी सेहत के लिए बल्कर होने वाले बच्चे के लिए भी खतरनाक है।
खून की कमी (एनीमिया) क्या है?
एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) या हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है। हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर में पहुंचाता है। जब हीमोग्लोबिन कम होता है, तो शरीर के अंगों और ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे थकान, कमजोरी और अन्य समस्याएं होती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य: भारतीय महिलाओं में एनीमिया का मुख्य कारण आयरन की कमी है, लेकिन केवल आयरन ही नहीं, विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी भी प्रमुख भूमिका निभाती है।
एनीमिया के लक्षण: आपको कैसे पता चलेगा?
एनीमिया के लक्षण अक्सर इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं उन्हें नजरअंदाज कर देती हैं या दैनिक जीवन का हिस्सा मान लेती हैं:
- थकान और कमजोरी: हल्का काम करने पर भी थकान महसूस होना, दिन भर सुस्ती रहना
- त्वचा का पीला पड़ना: चेहरे, हथेलियों, पलकों के अंदर की त्वचा और नाखूनों का रंग फीका पड़ जाना
- सांस लेने में तकलीफ: सीढ़ियां चढ़ने, थोड़ा चलने या हल्का काम करने पर ही सांस फूलना
- चक्कर आना या सिरदर्द: अचानक खड़े होने पर चक्कर आना, लगातार सिरदर्द बने रहना
- दिल की धड़कन तेज होना: बिना मेहनत के भी दिल तेजी से धड़कना
- बाल झड़ना: सामान्य से अधिक बालों का गिरना
- भूख कम लगना: खाने की इच्छा न होना, विशेषकर बच्चों में
- हाथ-पैर ठंडे रहना: गर्मी में भी हाथ-पैरों का ठंडा रहना
- एंग्जाइटी और चिड़चिड़ापन: मूड स्विंग होना, बिना बात के चिड़चिड़ापन
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई: काम या पढ़ाई में मन न लगना
चेतावनी: कई बार एनीमिया के लक्षण दिखाई नहीं देते या बहुत हल्के होते हैं। यही कारण है कि नियमित जांच बेहद जरूरी है। साल में कम से कम एक बार हीमोग्लोबिन टेस्ट अवश्य करवाएं।
एनीमिया का सस्ता और प्रभावी इलाज
अच्छी खबर यह है कि एनीमिया का इलाज महंगा नहीं है। कुछ सरल और सस्ते उपाय अपनाकर आप खून की कमी को दूर कर सकती हैं:
1. आयरन युक्त भोजन (सस्ते और आसानी से उपलब्ध)
आयरन दो प्रकार का होता है - हीम आयरन (पशु उत्पादों से) और नॉन-हीम आयरन (पौधों से)। भारतीय शाकाहारी आहार में नॉन-हीम आयरन का अवशोषण कम होता है, लेकिन विटामिन C के साथ लेने पर यह बढ़ जाता है।
हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ आदि आयरन के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें नियमित आहार में शामिल करें।
टिप: पालक को हमेशा उबालकर या भूनकर ही खाएं, कच्चा न खाएं।
तिल और गुड़
काला तिल और गुड़ का मिश्रण आयरन का बेहतरीन स्रोत है। रोजाना एक चम्मच काले तिल और थोड़ा गुड़ खाएं।
टिप: तिल को भूनकर पीस लें और गुड़ के साथ लड्डू बनाकर रख लें।
विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ
आंवला, नींबू, संतरा, टमाटर, अमरूद आदि विटामिन C से भरपूर हैं जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं।
टिप: भोजन के साथ नींबू पानी पीएं या सलाद पर नींबू निचोड़कर खाएं।
दालें और अनाज
मसूर की दाल, राजमा, चना, सोयाबीन, बाजरा आदि में भी आयरन प्रचुर मात्रा में होता है।
टिप: दालों को अंकुरित करके खाने से उनका पोषण मूल्य बढ़ जाता है।
चुकंदर और गाजर
चुकंदर आयरन का बेहतरीन स्रोत है। गाजर और चुकंदर का जूस रोजाना पीने से हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ता है।
टिप: चुकंदर के जूस में थोड़ा नींबू और काला नमक मिलाकर पीएं।
मेवे और ड्राई फ्रूट्स
किशमिश, खजूर, अंजीर, बादाम और अखरोट में आयरन भरपूर मात्रा में होता है।
टिप: रात को 5-6 किशमिश पानी में भिगोकर रख दें, सुबह खाली पेट खाएं।
2. आयुर्वेदिक और घरेलू उपचार
- आयुर्वेदिक काढ़ा: गिलोय, अश्वगंधा और मुलेठी का काढ़ा हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है
- हल्दी वाला दूध: रोजाना रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीएं
- मेथी के बीज: मेथी के बीज और पत्तियों का सेवन आयरन की कमी दूर करता है
- अश्वगंधा चूर्ण: एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गर्म दूध के साथ लेने से खून बढ़ता है
3. जीवनशैली में बदलाव
- नियमित व्यायाम: हल्का व्यायाम और योगासन (प्राणायाम, सूर्य नमस्कार) रक्तसंचार बेहतर करते हैं
- पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें, शरीर नई रक्त कोशिकाएं बनाता है
- तनाव प्रबंधन: ध्यान और योग से तनाव कम करें, तनाव भी एनीमिया का कारण बन सकता है
- नियमित जांच: साल में कम से कम एक बार हीमोग्लोबिन टेस्ट करवाएं
क्या न करें: एनीमिया में इन चीजों से बचें
- भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी न पीएं (कम से कम 1 घंटे का अंतर रखें)
- अत्यधिक कैल्शियम सप्लीमेंट्स न लें, ये आयरन के अवशोषण में बाधा डालते हैं
- प्रोसेस्ड और जंक फूड से दूर रहें, इनमें पोषक तत्व नहीं होते
- धूम्रपान और शराब से पूरी तरह परहेज करें
- बिना डॉक्टर की सलाह के आयरन टेबलेट्स न लें, अधिक आयरन भी नुकसानदायक हो सकता है
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सलाह
गर्भावस्था में एनीमिया गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है - समय से पहले प्रसव, कम वजन का बच्चा, प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव, और मां व शिशु दोनों के लिए खतरा।
- गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से हीमोग्लोबिन जांच करवाएं
- डॉक्टर द्वारा बताई गई आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां नियमित लें
- प्रसव पूर्व देखभाल क्लिनिक में नियमित जाएं
- पौष्टिक आहार का विशेष ध्यान रखें
- सरकार द्वारा चलाई जा रही आयरन युक्त गोलियों (आईएफए टैबलेट) का लाभ उठाएं
निष्कर्ष: एक स्वस्थ भविष्य की ओर
भारतीय महिलाओं में एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, लेकिन यह पूरी तरह से रोकी और ठीक की जा सकने वाली समस्या है। जरूरत है सिर्फ जागरूकता और थोड़े से प्रयास की। सही पोषण, नियमित जांच और उचित इलाज से हम इस समस्या पर काबू पा सकते हैं।
याद रखें, एक स्वस्थ महिला एक स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की नींव है। अपनी सेहत को प्राथमिकता देना स्वार्थ नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है।
आज ही अपना हीमोग्लोबिन टेस्ट करवाएंमहत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं
भारत सरकार ने एनीमिया को कम करने के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं:
- आयरन फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम: स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से मुफ्त गोलियां
- अन्नप्राशन दिवस: 6 महीने के बच्चों को पौष्टिक आहार शुरू करवाना
- राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan): कुपोषण और एनीमिया को कम करने का राष्ट्रीय अभियान
- विटामिन A सप्लीमेंटेशन: बच्चों के लिए विटामिन A की गोलियां
इन योजनाओं का लाभ उठाएं और दूसरों को भी जागरूक करें।

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